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पिया तोसे लगा जो यह मन

पिया तोसे लागा जो यह मन
मैं तो हो गई हूँ रे मगन
पिया तोसे लागा जो यह मन
मैं तो हो गई हूँ रे मगन
बन के फिरूँ मैं श्याम की जोगन
हाँ……..
बन के फिरूँ मैं श्याम की जोगन
लागी ऐसी लगन…
पिया तोसे लागा जो यह मन
मैं तो हो गई हूँ रे मगन

तुमपर ही अर्पण मेरा जीवन
तुम्हारे बिना अब कुछ भी नहीं है
पूजा करूँ मैं सांझ सुबह
राह तके तेरी मीरा यहीं है
सांझ भी तू, श्रृंगार भी तू
संसार भी तू कान्हा…
क्षण भर भी अब दूर रहो ना
दरशन दो कान्हा
दरशन दो कान्हा

दिल मेरा कूक-ए-कोयल बनके
दिल मेरा कूक-ए-कोयल बनके
आँ मिलो सजना
पिया तोसे लागा जो यह मन
मैं तो हो गई हूँ रे मगन..
मा धा पा पा पा
मा धा पा पा पा
मा धा नि नि नि
धा नि सा सा सा
सा नि धा धा धा
नि धा पा पा पा
मा गा, रे गा मा धा, पा मा गा रे
पा मा गा रे सा
पिया संग लगा जो यह मन
सखी हो गई रे तू मगन..

मुरली मनोहर, मेरे गिरधर
आओ पधारो, मेरे द्वारे
मोसे यह हरदम पूछती हैं सखियाँ
कब आएंगे प्रीतम प्यारे
मान भी तू, अभिमान भी तू
सम्मान भी तू मोहन
छोड़ के जग को प्रीत किया है
बस तुझसे मोहन
बस तुझसे मोहन
कानों में गूँजे तेरी बांसुरीया
कानों में गूँजे तेरी बांसुरीया
झूमे सारा गगन
पिया तोसे लागा जो यह मन
मैं तो हो गई हूँ रे मगन..

मेरे मन में तू
धड़कन में तू
पिया अब मेरे कण कण में तू
मेरे मन में तू
धड़कन में तू
पिया अब मेरे कण कण में तू
माला जपूँ तेरे नाम की
दिखता है हर दर्पण में तू
दिखता है हर दर्पण में तू
संग रहेंगे जनमों-जनम तक
संग रहेंगे जनमों-जनम तक
आके मिटा दो दूरी सनम अब
आके मिटा दो दूरी सनम अब
चरणों में तेरी खुशियाँ सारी
कर दूँ मैं अर्पण
झूम तना ना ना ना
दे रे ना ता ना ना ना
झूम तना ना ना ना
दे रे ना ता ना ना ना
झूम तना ना ना ना
दे रे ना ता ना ना ना
झूम तना ना ना ना
दे रे ना ता ना ना ना

श्याम रंग जो लूँ तन पर
मैं तो तकूँ रे जीवन सारा
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
देवकीनंदन आओ पधारो
बाजे रे तशी
बाजे रे मृदंग
बाजे रे तशी, बाजे रे मृदंग
झूम रे सखी अपने पी के संग
पैरों में घुंघरू बाँध के नाचे
छनन्नन्नानाना……

जब से राधा कान्हा को सजन
मीरा हो गई तबसे है मगन
नाम जपे तेरा हर सुबह हर क्षण
मीरा हो गई तबसे है मगन
जबसे है मेघा गूँजे रे गगन
मीरा हो गई तबसे है मगन
सुनते बंसीया इसके नाम की
आँ पधारें…..
पिया…
पिया…


पिया तोसे लागा जो यह मन
मैं तो हो गई हूँ रे मगन

जब मेरा कृष्णत्व से मन लगा है तो अब मेरी पूरी तरह से कृष्णत्व में ही मगन हो गईं हूँ।

बन के फिरूँ मैं श्याम की जोगन
लागी ऐसी लगन…

अब तो एसी खुमारी लगी है की सिर्फ कृष्णत्व की मैं जोगन बाँके घूमती हूँ।

तुमपर ही अर्पण मेरा जीवन
तुम्हारे बिना अब कुछ भी नहीं है

जो एक मात्र सत्य है उसको मेरा अब सब समर्पित है। और उस सत्य के अलावा अब कुछ नहीं बचा।

पूजा करूँ मैं सांझ सुबह
राह तके तेरी मीरा यहीं है

अब कृष्णत्व की ही मैं दिन रात याद करतीं हूँ।

सांझ भी तू, श्रृंगार भी तू
संसार भी तू कान्हा…
क्षण भर भी अब दूर रहो ना
दरशन दो कान्हा
दरशन दो कान्हा

अब सब मेरा तू ही है सांझ, श्रृंगार, संसार। मैं तुच्छ अहं रूप मैं पैदा हुआ था, अब सत्य देखने के बाद एक मैं क्षण भर भी सत्य से दूर नहीं रह सकता। कितना मुझे तड़पाओगे, अब तो मुझे अपना प्रेम नगर दिखाओ।

दिल मेरा कूक-ए-कोयल बनके
दिल मेरा कूक-ए-कोयल बनके
आँ मिलो सजना

अब तो मेरा हृदया कोयल जैसे कूकता रेहता है तेरे प्रेम मैं। अब तो मुझे से मिल लो।

पिया संग लगा जो यह मन
सखी हो गई रे तू मगन..

अब जो कृष्णत्व के लिए प्रेम जागा है उसके बाद अब सिर्फ में प्रेम मैं ही लीन हूँ।

मुरली मनोहर, मेरे गिरधर
आओ पधारो, मेरे द्वारे
मोसे यह हरदम पूछती हैं सखियाँ
कब आएंगे प्रीतम प्यारे

अब तेरी अनहद मुरली वाले कृष्ण अब तो मुझे सत्य के दर्शन दो। मुझसे सब पूछ रहे की प्रेम की इतनी बात करते हो लेकिन प्रीतम कहाँ है।

मान भी तू, अभिमान भी तू
सम्मान भी तू मोहन
छोड़ के जग को प्रीत किया है
बस तुझसे मोहन
बस तुझसे मोहन

मान, अभिमान, सम्मान, सब तू ही है अब। इस मिथ्यात्मक भ्रमित जग तो छोड़ के अब मैंने परमसत्य से प्रेम किया है।

कानों में गूँजे तेरी बांसुरीया
कानों में गूँजे तेरी बांसुरीया
झूमे सारा गगन

तेरी अनहद बांसुरीया मैं क्या पूरी सृष्टि झूम जाएगी।

मेरे मन में तू
धड़कन में तू
पिया अब मेरे कण कण में तू

अहंकार अब पूरी तरह से मीट गया है और अब मेरे कण कण में सिर्फ तू ही है।

माला जपूँ तेरे नाम की
दिखता है हर दर्पण में तू

सिर्फ तेरा ही नाम अब मेरी जीभ पर है। अब मैं और दूसरा नहीं दिखता, सिर्फ कृष्ण ही चारो तरफ है।

संग रहेंगे जनमों-जनम तक
आके मिटा दो दूरी सनम अब

प्रकृति में हर पल मरती और जन्म लेती है। हर जन्मो में मुझे सिर्फ परम सत्य के साथ एक होता है।

चरणों में तेरी खुशियाँ सारी
कर दूँ मैं अर्पण

मेरे जो भी है खुशियाँ, मन, बुद्धि, अब मैंने वो तुझे अर्पण कर दिया है।

श्याम रंग जो लूँ तन पर
मैं तो तकूँ रे जीवन सारा

जब परमात्मा का रंग तन पर लगा तो अपने जीवन को गहराई से देखना शुरू कर दिया।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
देवकीनंदन आओ पधारो

मेरे सब कुछ ही कृष्ण है। परमात्मा मुझे मिटा दो और इस देह में सत्य को आने दो।

बाजे रे तशी
बाजे रे मृदंग
बाजे रे तशी, बाजे रे मृदंग
झूम रे सखी अपने पी के संग
पैरों में घुंघरू बाँध के नाचे
छनन्नन्नानाना……

और तो स्वयं मैं परमात्मा से साथ नाचती हूँ।

जब से राधा कान्हा को सजन
मीरा हो गई तबसे है मगन

जब से देखा है की प्रेमी बनकर भी जीवन जा सकता है तब से ही मैं प्रेमी हूँ।

नाम जपे तेरा हर सुबह हर क्षण
मीरा हो गई तबसे है मगन

जब तेरा नाम लेना शुरू किया है तब से प्रेम का शुरुर चढ़ा है। और अब मेरा मन परमात्मा में ही मगन रेहता है।

जबसे है मेघा गूँजे रे गगन
मीरा हो गई तबसे है मगन

मैं तो अनंत काल से प्रेमी हूँ, जब से बादल गूँजते है।

सुनते बंसीया इसके नाम की
आँ पधारें…..
पिया…
पिया…

अब कृष्ण की अनहद बांसुरी सुन कर ही हर क्षण निकालना है।