अब नींद क्या है जब बन गया राम का मजदूर

अब नींद क्या है,
जब बन गया राम का मजदूर।

अब तो मर्यादा पुरुषोत्तम को मान लिया आदर्श,
तो कैसे रहूँगा उच्चतम से दूर।

दुर्जनों ने गिराया है उत्तम और धर्म का नाम,
राम को देना है हिसाब मूल।

हटानी है अपनी—
दुर्बलता, मूर्खता, तुच्छता, शूद्रता।
उसे बाद ही मिलेंगे हुज़ूर।