अज्ञान
परिभाषा:
अज्ञान वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति मिथ्या को सत्य मान लेता है।
व्याख्या
जब “मैं” को अलग और स्वतंत्र मान लिया जाता है, तब [[द्वैत]] पैदा होता है।
यही विभाजन [[समय]], असंतोष और भ्रम को जन्म देता है।
मुख्य बिंदु
- अज्ञान = द्वैत का भ्रम = जीव और जगत को अलग देखना
-
अज्ञान = [[अहंकार अहं]] और प्रकृति के बीच बने झूठे फासले को सत्य मान लेना है। - “मैं अलग हूँ” — मूल गलत पहचान
- अज्ञान → दूरी → असंतोष → समय
- ज्ञान = दूरी का अंत
एक पंक्ति सार
अज्ञान वस्तु नहीं — गलत पहचान है।
संबंधित अवधारणाएँ
[[समय]]
[[अहंकार]]
[[मुक्ति]]