अध्यात्म

[[आत्मज्ञान]] की ओर मार्गदर्शन को अध्यात्म कहते है ।

[[श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 सार — गीता दुनिया की सारी समस्या का समाधान है#अध्यात्म — क्षेत्र नहीं, आधार|अध्यात्म — क्षेत्र नहीं, आधार]] है। अध्यात्म कोई अलग क्षेत्र नहीं है। यह जीवन की आधार-रचना है। जैसे श्वास और हृदय-धड़कन किसी एक काम का भाग नहीं — वे हर काम के साथ चलते हैं।

अध्यात्म प्रकाश है। विषय नहीं।

सफेद, काला, अच्छा, बुरा — कुछ भी देखने के लिए प्रकाश चाहिए। प्रकाश स्वयं वस्तु नहीं होता, परंतु उसके बिना कोई वस्तु देखी नहीं जा सकती।

इसी प्रकार, आत्मज्ञान वह प्रकाश है जिसमें व्रत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। जब तक व्रत्ति देखी नहीं जाती, वह संचालित करती है। जब देखी जाती है, तब उसका प्रभुत्व कम होता है।

  • [[श्रीमद्भगवद्गीता]].
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    • [[ताओ ते चिंग]].
    • [[शून्यता सप्तति]].

अन्य
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