अब नींद क्या है जब बन गया राम का मजदूर
अब [[नींद]] क्या है,
जब बन गया [[संघर्ष|राम का मजदूर]]।
अब तो मर्यादा पुरुषोत्तम को मान लिया आदर्श,
तो कैसे करूँगा औसत प्रदर्शन।
दुर्जनों ने गिराया है उत्तम और धर्म का नाम,
राम को देना भी तो हिसाब।
मैं तो हूँ दास,
अब कैसे करूँ आज्ञा को माना।
लेकिन पहले हटानी है अपनी—
दुर्बलता, मूर्खता, तुच्छता, शूद्रता।
बिना उसके तो दस बनने की योग्यता भी नहीं।
निर्गुण पहले से ही है असीम बल,
बस देखना है [[बोध केंद्र|राम का केंद्र]]।
बस अब निकल जाए धनुष से बाण,
और मिले जाए रावण और बाण।