अवलोकक प्रभाव
इन दोनों का अर्थ यह है कि जब कोई व्यक्ति या यंत्र किसी घटना को देखता या अवलोकन करता है, तो वह अवलोकन स्वयं उस घटना के परिणाम या व्यवहार को बदल देता है।
-
भौतिकी में (क्वांटम यांत्रिकी):
जैसे डबल‑स्लिट प्रयोग में इलेक्ट्रॉन तब तक तरंग की तरह व्यवहार करता है जब तक उसे नहीं देखा जाता; जैसे ही उसका मापन/अवलोकन किया जाता है, वह कण की तरह व्यवहार करने लगता है। -
मनोविज्ञान में:
जब लोग जानते हैं कि उन्हें देखा जा रहा है, तो वे अपने सामान्य व्यवहार से अलग ढंग से बर्ताव करते हैं (जैसे ऑडिट के समय कर्मचारी अधिक सावधानी से काम करते हैं)।