अष्टावक्र गीता 14.1 — आत्म अवलोकन
अष्टावक्र गीता 14.1 — आत्म-अवलोकन
जो स्वभाव से ही शून्य-चित्त है, किन्तु प्रमादवश भावों की कल्पना करता है — वह उस व्यक्ति के समान है जो सोया हुआ होते हुए भी जागा हुआ-सा प्रतीत होता है; निश्चय ही उसकी स्मृति क्षीण है।
अहं मिथ्या मात्र है और “मैं” अपने को कुछ नहीं मानता । न मेरे मन में जो भी आता है मैं उसे मूल्य देता हूँ। बिषयों के काम है आना लेकिन में तो उन्हे [[साक्षीत्व]] की तरह देखता हूँ । हर व्यक्ति को पता होना चाहिए अहंकार के लिए दुनिया सिर्फ एक नशा है । और नशे के अंत माने अहंकार का अंत ।
अष्टावक्र ने सामने सच रख दिया । हम सत्य में स्वभाव से तो शून्य है लेकिन हम प्रमादवश भावों की कल्पना करते है । ये दुनिया की सारी चीज़े एसी है जैसे कोई सोया हो लेकिन उसे सपना सत्य लगता है ।
मनुष्य (अहंकार) भी हर क्षण सपने में जी रहा है । निश्चय ही उसकी स्मृति क्षीण है।
ये सपने की स्म्रतिया एसे समान है की अहंकार को नशा हो ।
इसे एक गाने से समझेंगे ।
मुझे दुनियावालों शराबी ना समझो
मैं पीता नहीं हूँ, पिलाई गई है
जहाँ बेखुदी में कदम लड़खड़ाए
वहीं राह मुझको दिखाई गई है
दुनिया वालों तुम मुझे क्या सही गलत बता रहे हो । मैं नहीं पिता लेकिन तुम्हारी कमबख्त मूर्ख दुनिया एसी है की उसने मुझे भी पीने वाला तुम्हारे जैसे बना दिया है । जहां कदम मेरा सही नहीं था वही मुझे तुम लोगो ने भेज दिया है ।
नशे में हूँ लेकिन मुझे ये खबर है
कि इस जिंदगी में सब पी रहे हैं
किसी को मिले हैं छलकते प्याले
किसी को नज़र से पिलाई गई है
मैं भी नशे में होऊंगा लेकिन मुझे ये पता है की पूरी दुनिया में सब नशे में है ।
किसी को उनके साथ में पियाले दिये गए है और दूसरे लोगो को देख देख कर उन्हे मजबूर कर दिया पीने को।
किसी को नशा है जहाँ में खुशी का
किसी को नशा है ग़म-ए-जिंदगी का
कोई पी रहा है लहू आदमी का
हर एक दिल में मस्ती रचाई गई है
कोई पूरी जिंदगी में खुसी से पीछे भागता है और कोई दुख का मजा लेता है - सब नशे कर रहे है ।
कोई दूसरों में चढ़ता है, लोगो को दबाता है । हर एक के दिल में पता नहीं अंधकार के लिए क्या मस्ती है ।
ज़माने के यारों चलन हैं निराले
यहाँ तन हैं उजले मगर दिल हैं काले
ये दुनिया है दुनिया यहाँ माल-ओ-ज़र में
दिलों की खराबी छुपाई गई है
ओ सुनो भाई मेरे दोस्तो, इस दुनिया में चलन, दिखावा बहुति निराला है । यहाँ तन से यानि बाहर से लोग अच्छे बनते है लेकिन अंदर से सब कामी है । यह दुनिया में सिर्फ चीज़े आंखो को अच्छा दिखाने की लिए बनाई गयी है और दिलो की खराबी छुपाई गई है।