अहंकार
जिस माटी पर बहुती माटी, सो माटी हंकार।
अहंकार निवारो रे मन, अहंकार बड़ा दुखदाई।
अहंकार तजि जो जीव जाने, वही जाने राम सहाई॥
परिभाषा
अहंकार वह झूठा केंद्र है जो कहता है — “मैं करता हूँ, मैं जानता हूँ, मैं पाता हूँ।” अनुभव में सच्चा लगता है पर खोजो तो मिलता नहीं।
मुख्य बिंदु
- जन्म से जुड़ा हुआ अनुभव
- रूप बदलता है, समाप्त नहीं होता
- ज्ञान, भक्ति, त्याग — सबमें छुप सकता है
- खुद को तेज मानता है
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