आत्म अवलोकन

जब मनुष्य स्वयं को देखना शुरू करता है —
अपनी प्रतिक्रियाओं को, अपनी इच्छाओं को, अपनी असुरक्षाओं को —
तब धीरे-धीरे यह स्पष्ट होने लगता है कि भीतर क्या चल रहा है।