कल मनुष्य आज ai, माया का ये खेला

कल मनुष्य आज AI, माया का ये खेला ।
एक पात डरे दूसरे पात से, माया का ये मेला ।
कैसे बनेगा अजन्मा अगर गुरु से बचेगा चेला ।
माटी का है ये खेला, उद जा रे हंस अकेला ।