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Bhajans.
2026
खलक सब रैन का सपना
रहना नहीं देस बिराना है
पिया मोर जागे मैं कैसे सोई री
हमन है इश्क मस्ताना
वारि जाऊँ मैं सतगुरु के
श्री हरि स्तोत्रम्
2025
माटी कुदम करेंदी यार वाह वाह माटी दी गुलज़ार
घड़ियाली दियो निकाल नी
तोहि मोहि लगन लगाय रे फकीरवा
घूँघट के पट खोल रे
मेरी नैया पड़ी है मजधार
नहिं मानै मूढ़ गँवार, मैं कैसे कहूँ समझाय
उड़ जायेगा हंस अकेला
जगत में कैसा नाता रे
जग बौराना
क्या तन मांजतारे एक दिन माटी में मिल जाना
नैहरवा हमका न भावे
साधो ये मुर्दों का गाँव
ना मैं धर्मी नाहिं अधर्मी
पीले प्याला हो मतवाला
पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवत हाँसी
मोको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में
निर्वाण षट्कम
अमरपुर ले चलो सजना
अब हम गुम हुए, गुम हुए, गुम हुए प्रेम नगर की सैर
राम बिन तन की ताप न जाई
समझ देख मन मीत पियरवा
तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे
राम भजा सो जीता जग में
मन मस्त हुआ तब क्यों बोले
जो मैं बोरा तो राम तोरा
इश्क़ है आसमां में उड़ के जाना
जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल
माया तजूं तजि नहिं जाइ
चलना है दूर मुसाफ़िर