कोहम

“कोहम?” (मैं कौन हूँ?)

यह सब किसके लिए है? कौन है जो परिवर्तन का अनुभव कर रहा है?

यदि यह प्रश्न स्पष्ट न किया जाए तो उत्पत्ति और विनाश का सारा विमर्श केवल विचारों की क्रीड़ा बनकर रह जाता है। जब तक “मैं” की संरचना को नहीं देखा जाता, तब तक परिवर्तन की सारी चर्चा अधूरी है।


[[epistemology]]