चाहे ढूँढना जीवन का मतलब, न देखे है ब्रह्म सागर में
चाहे ढूँढना जीवन का मतलब, न देखे है ब्रह्म-सागर में ।
जगत से ये कैसा नाता, रहना पड़े दुख में ॥
अहंकार माने खुद को अलग और सीमित, न देखे हर अंक है अनंत ।
पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवत हाँसी ॥