जीव

परिभाषा:
जीव वह है जो स्वयं को एक सीमित, अलग अस्तित्व के रूप में अनुभव करता है।

संरचना: चेतना + पहचान → जीव

मुख्य बिंदु:

  • जीव वास्तविक नहीं, बल्कि अनुभवगत है
  • यह चेतना का सीमित रूप नहीं, बल्कि सीमित अनुभव है
  • जीव स्वयं को जगत से अलग मानता है

भ्रम:

  • “मैं अलग हूँ”
  • “मेरा अनुभव मेरा है”

सत्य:
जीव और जगत दोनों एक ही [[प्रकृति]] के रूप हैं।