ज्ञान

[[समता]] देखना ही असली ज्ञान है ।

ज्ञान मुखौटों को उतारने की प्रक्रिया है। यह प्रक्षेपणों और मान्यताओं की जांच करता है। इसका अंतिम लक्ष्य “मैं” की वास्तविकता की परीक्षा है। नेति-नेति के माध्यम से ज्ञान अहं को निरस्त करता है।