दिनचर्या को माने दुख, जीवन को माने श्राप

दिनचर्या को माने दुख, जीवन को माने श्राप ।
लोभी मूर्खजग से नाता बनाए, इलजाम जीवन को दे ।
गुम हुआ है तो मनाले उत्सव, प्रेम नगर का ये शहर है ।
कहे हरेन्द्र सुनलेरे बंदे, सतानंदप्रेम-कृष्णभक्ति ही हर रोग का इलाज ।