ध्यान

परिभाषा:
ध्यान का अर्थ है जो पकड़ा हुआ है, उसे छोड़ देना।
ध्यान कोई उपलब्धि नहीं है, कोई अनुभव जोड़ना नहीं है।

  • जब मन सौ विषयों में बंटा हो, जीवन भी बिखरता है।
  • अहंकार भूखा है, वह हर दिशा में भागेगा।

भ्रम:

  • ध्यान = अभ्यास ❌
  • ध्यान = तकनीक ❌

वास्तविकता:

  • ध्यान = देखने की शुद्धता ✔

जीवन का बिखराव

स्थिति परिणाम
कम विषय मन अपेक्षाकृत स्थिर
अधिक विषय मन बिखरा हुआ
आकर्षक विषय अहंकार का पोषण
विषयों का त्याग स्पष्टता

आज विकल्प अनंत हैं, इसलिए ध्यान कठिन है।


संबंधित अवधारणाएँ
[[ताओ ते चिंग अध्याय 15 — ज्ञानी का स्वरूप और ध्यान का अर्थ]]