निष्काम कर्म

परिभाषा

ऐसा कर्म जिसमें कर्तापन और फल-आसक्ति नहीं हो।
सही कर्म जिसके केंद्र में सत्य हो - जो कामना और चाह से रहित हो ।

तुलना

सकाम कर्म निष्काम कर्म
मैं कर रहा हूँ कर्म हो रहा है
फल की अपेक्षा सहजता
मान्यता की चाह आंतरिक संतुलन

व्याख्या

निष्काम कर्म उदासीनता नहीं है।
यह पूर्ण सहभागिता है, पर बिना कहानी के।

कर्म करने के लिए अहंकार नहीं कहिए । अहंकार कर्म करता है और फिर उसपर कहानिया बनाता है । बिना अहंकार और बिना उसकी कहानिया के कर्म ही [[निष्काम कर्म]] है ।

सार

जहाँ कर्म है पर कर्ता नहीं — वही निष्काम कर्म।

English - [[Nishkama Karma]].

अन्य

  • [[Bhagavad Gita 3.22 — Desireless, Yet Fully Engaged The Paradox Ego Cannot Understand]]
    • [[Bhagavad Gita 3.22 — Desireless, Yet Fully Engaged The Paradox Ego Cannot Understand#Love as the Only Non-Egoic Movement|Love as the Only Non-Egoic Movement]]
  • [[Bhagavad Gita 3.23 — The Highest Must Remain Active, Else Ego Becomes the Guide]]
    • [[Bhagavad Gita 3.23 — The Highest Must Remain Active, Else Ego Becomes the Guide#The Paradox of Obligation|The Paradox of Obligation]]