नेति नेति

यह नहीं → यह नहीं → पहचान का क्षय → शुद्ध बोध

नेति-नेति जोड़ने की नहीं, हटाने की प्रक्रिया है।

यह कहता है:

  • मैं शरीर नहीं
  • मैं मन नहीं
  • मैं विचार नहीं

यह पूछता है [[कोहम]]? यही [[वेदांत]] का सार है।

यह निषेध अंततः उस स्थिति तक ले जाता है जहाँ केवल शुद्ध बोध शेष रहता है।

यह ज्ञान का accumulation नहीं, बल्कि अनावश्यक का dissolution है।