पहचान
परिभाषा:
पहचान वह प्रक्रिया है जिसमें विचार को “मैं” से जोड़ा जाता है।
व्याख्या:
पहचान वह प्रक्रिया है जिससे अहं उत्पन्न होता है।
यह चेतना का विचारों, भावनाओं और भूमिकाओं के साथ जुड़ जाना है।
उदाहरण:
“मुझे क्रोध आ रहा है” के बजाय “मैं क्रोधित हूँ”
विचार → स्वामित्व → पहचान
पहचान के बिना विचार और भावनाएँ आती हैं, पर “मैं” नहीं बनता।
पहचान = अहं का निर्माण
संरचना:
विचार → जुड़ाव → “मैं” → पहचान
भूमिका:
- अहं का निर्माण
- अनुभव का निजीकरण