पुनर्जन्म

मूल विचार
कर्म होने पर कर्ता बदल जाता है — और वही नया जन्म है।
जो समझ एक बार जागती है, वह अगली अवस्थाओं में भी मार्गदर्शन करती है।

मुख्य विचार

  • पुनर्जन्म भविष्य की घटना नहीं, आंतरिक परिवर्तन है।
  • हर अनुभव के बाद नया कर्ता जन्म लेता है।
  • सही कर्म बाहरी परिणाम से पहले भीतर के कर्ता को बदलता है।
  • परिवर्तन = नया जन्म।

मुख्य बिंदु

  • अनुभव = परिवर्तन
  • interaction = दो तरफ़ा बदलाव
  • देखने से भी परिवर्तन होता है
  • स्थायी पहचान एक भ्रम है
  • मापन‑प्रभाव.

एक पंक्ति सार
हर अनुभव के साथ नया “मैं” जन्म लेता है।

संबंधित अवधारणाएँ
[[श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 43 — पुनः जन्म प्रतिपल है]]
[[समय]]