प्रवाह

जमाव → अहं → बन्धन
    ↓
पिघलना → प्रवाह → प्रेम

परिभाषा:
प्रवाह वह स्थिति है जहाँ जीवन को नियंत्रित नहीं किया जाता, बल्कि उसे होने दिया जाता है।

मुख्य बिंदु:

  • प्रवाह = अनिश्चितता को स्वीकार करना
  • प्रवाह = अनुभव को न रोकना

सूत्र:
जहाँ कठोरता समाप्त होती है, वहीं से प्रेम शुरू होता है।