प्रेम रस चखो

तुम कामनाओ से रस लेते हो । गाँजा अफ़ीम और पोस्तो भाँग, और शराबे पीवता । धन-दौलत मान-सम्मान, पीछे दौड़त हो। एक प्रेम रस चखा नहीं ।

प्रेम रस सारे रासो में श्रेस्ठ है । एक बार चख लिया तो और रस सुद्र लगने लगेंगी ।