बोध केंद्र
जो [[माया]], [[अहंकार]], [[मृत्यु]], [[राम]] तो जनता हो । और [[आत्मा]] के केंद्र से जीता हो ।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहीं।
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माहीं।।
जो [[माया]], [[अहंकार]], [[मृत्यु]], [[राम]] तो जनता हो । और [[आत्मा]] के केंद्र से जीता हो ।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहीं।
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माहीं।।