बोध केंद्र

जो [[माया]], [[अहंकार]], [[मृत्यु]], [[राम]] तो जनता हो । और [[आत्मा]] के केंद्र से जीता हो ।

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहीं।
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माहीं।।

ज्ञान और बोध में अंतर || आचार्य प्रशांत (2016) - YouTube.