मनोवैज्ञानिक अहं

मनोवैज्ञानिक अहं = कर्ता-भाव  
                 = विकृति का स्रोत

यह हर अनुभव के पीछे “मैं” जोड़ देता है।

यही [[दुःख]] का कारण है।

यह वास्तविकता को नहीं देखता—बल्कि अपनी इच्छाओं के अनुसार उसे बदल देता है।

इसे साधारण तरीके से सिर्फ [[अहंकार]] बोल दिया जाता है।