मुक्ति
मूल विचार
मुक्ति = [[अहंकार|अहं]] की धारा का शांत होना
व्याख्या
प्रकृति की समयधारा को रोका नहीं जा सकता।
लेकिन अहं की मनोवैज्ञानिक धारा समाप्त की जा सकती है — वही मुक्ति है।
मुख्य बिंदु
- प्रकृति का समय चलता रहेगा
- अहं का समय समाप्त हो सकता है
- I-axis समाप्त → मुक्ति
- [[द्वैत]] का अंत = समय अनुभव का अंत
- [[अज्ञान]] = अहं-प्रकृति दूरी
एक पंक्ति सार
समय नहीं मिटता — समय का अनुभव मिटता है।
संबंधित अवधारणाएँ
[[समय]]
[[मैं समय में नहीं हूँ, समय मुझमे हैं]]
[[समत्व ही शिवत्व है]]