राम
सत्य, मुक्ति, आनंद, ब्रह्म को राम कहते है ।
राम को पाना मतलन मुक्तिपूर्ण, आनंदपूर्ण जीवन जीना ।
राम के लिए जीना मतलन आत्मप्रेम, मुक्ति, श्रेस्ठ्ता, उत्तमता के जीना ।
मैं बौरी मेरे राम भरतार
ता कारण रचि करूँ स्यंगार।
राम के लिए स्यंगार करना मतलब उनके लिए उत्तम बनना।
संबंधित अवधारणाएँ
[[राम भजा सो जीता जग में]]
[[राम बिन तन की ताप न जाई]]
[[जो मैं बोरा तो राम तोरा]]
[[फिरत-फिरत माया के पीछे, चाहे बोरे राम]]