सतर्कता
अहं → शत्रु की कल्पना → बाहरी संघर्ष
↓
स्वयं पर दृष्टि → आंतरिक शत्रु का बोध
परिभाषा:
सतर्कता वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाहरी नहीं, आंतरिक संरचना को देखता है।
मुख्य अंतर्दृष्टि:
- असली शत्रु बाहर नहीं है
- “मैं” की रक्षा करने वाली प्रक्रिया ही संघर्ष का कारण है
सूत्र:
सतर्कता = स्वयं के भ्रम को पहचानना