साक्षीभाव

विचार:
चयनरहित जागरूकता, जहाँ विचार और भावना केवल देखे जाते हैं।

व्याख्या:
अहं ढीला पड़ता है, प्रतिक्रिया नहीं आती, केवल जागरूकता रहती है।

आध्यात्मिक सार:
अद्वैत अनुभूति; मनोवैज्ञानिक दूरी का अंत।

संबंधित अवधारणाएँ
[[समता]]
[[मैं समय में नहीं हूँ, समय मुझमे हैं]]
[[ताओ ते चिंग अध्याय 15 — ज्ञानी का स्वरूप और ध्यान का अर्थ]]
[[सनातन धर्म क्या है — सनातनी किसे मानें]]