BHAJAN

सुनता नहीं धुन की खबर, अनहद का बाजा बाजता

सुनता नहीं धुन की खबर, अनहद का बाजा बाजता ।२।

काशी गया और द्वारका, तीरथ सकल भरमत फिरे ।२।
गट्ठी न खोली कपट की ।२।
तीरथ गया तो क्या हुआ।

सुनता नहीं धुन की खबर, अनहद का बाजा बाजता।

गाँजा अफ़ीम और पोस्तो भाँग, और शराबे पीवता ।२।
एक प्रेम रस चखा नहीं ।२।
अमली बना तो क्या हुआ ।

सुनता नहीं धुन की खबर, अनहद का बाजा बाजता।

काजी किताबें बाँच कर, मसले सुनावे और को ।२।
महरम नहीं उस हाल से ।२।
काजी बना तो क्या हुआ ।

सुनता नहीं धुन की खबर, अनहद का बाजा बाजता।

अवधूता
युगन युगन हम योगी ।२।
युगन युगन हम योगी।
आवै ना जावै, मिटे ना कबहूँ
शबद अनाहत भोगी,
अवधूता
युगन युगन हम योगी ।२।

~ कबीर साहब