सौंदर्य

मूल विचार
सुंदरता वस्तु में नहीं — निरहंकार दृष्टि में है।

व्याख्या
अच्छा-बुरा, सुंदर-बदसूरत — ये सब द्रष्टा की मानसिक परिभाषाएँ हैं।
जहाँ अहंकार हट जाता है, वहाँ जो है वही सुंदर प्रतीत होता है।

मुख्य बिंदु

  • सुंदरता = अहं का अभाव
  • बदसूरती = मानसिक प्रक्षेपण
  • सत्य के प्रति निष्ठा = आध्यात्मिक प्रेम
  • सामाजिक आकर्षण ≠ आध्यात्मिक सुंदरता

एक पंक्ति सार
जहाँ “मैं” नहीं — वही सुंदर है।

संबंधित अवधारणाएँ
[[अहंकार|अहं]]