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अष्टावक्र गीता
ताओ ते चिंग
कठोपनिषद
शून्यता सप्तति
Gems from the World
श्रीमद्भगवद्गीता
संत सरिता
Existentialism
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हिंदी
2026
खलक सब रैन का सपना सत्र 2 — कठिन है मोह की धारा, बहा सब जात संसारा
अष्टावक्र गीता श्लोक 13.7 — आनंद सुख-दुःख के अभाव का नाम है
खलक सब रैन का सपना सत्र 1 — न अहंकार सत्य है, न विषय से संबंध
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 47 — जो केवल कृष्ण को ही भजते हैं, वही सर्वश्रेष्ठ योगी हैं
Waiting for Godot — On Waiting as Self-Sabotage
Shrimad Bhagavad Chapter 3, Verse 17 — On Ego, Duty, and Freedom
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 46 — सबसे श्रेष्ठ योगी है
कठोपनिषद 1.2.16 — अक्षर को जानना ही इच्छा-समाप्ति है
Shrimad Bhagavad Gita 3.16 — A life spent consuming is a life wasted
We Live as One Lives — On Imitation, Ego, and Borrowed Life
शून्यता सप्तति छंद 30 — न सशर्त, न निःशर्त, कुछ भी नहीं
श्रीमद्भगवद्गीता 6.44 — जिज्ञासा से शब्द-ब्रह्म के पार तक
वारि जाऊँ मैं सतगुरु के — सच्चा गुरु कोन?
ना मैं धर्मी नाहिं अधर्मी — कबीर न कुछ बनाते हैं, न कुछ मिटाते हैं
2025
ना मैं धर्मी नाहिं अधर्मी सत्र 7 — सत्य को तो सिर्फ एक बिरला बुझता है
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 43 — पुनः जन्म प्रतिपल है
The Country of the Blind — In the Land of the Blind, Who Needs Eyes?
शून्यता सप्तति छंद 1 — सब शून्य है, सब झूठ है
कठोपनिषद 1.2.15 — ॐ क्या है?
ताओ ते चिंग अध्याय 14 — देखो-उसे देखा नहीं जा सकता
अष्टावक्र गीता 13.4, 13.5 — मैं सारे बंधन परे आनंद में स्थित हूँ