महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
यह मंत्र शरीर की मृत्यु से बचाने की नहीं, बल्कि अहंकार के जाल से मुक्ति की प्रार्थना है।
शब्दार्थ आसान भाषा में:
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त्र्यम्बकं यजामहे
तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं।
उनका तीसरा नेत्र - अज्ञान और द्वैत को जला देता है। -
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
सुगंधित, जीवन पोषक शिव।
सच्चे स्व को मजबूत करने वाले। -
उर्वारुकमिव बन्धनान्
जैसे पका ककड़ी बेल से अपने आप अलग हो जाता है।
वैसे ही आध्यात्मिक पकाव से बंधन टूट जाएं। -
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
मृत्यु के चक्र से मुक्त करो।
लेकिन क्षणिक दुनिया से नहीं, अमर सत्य में स्थापित करो।
मुख्य संदेश:
बस जाप मत करो। समझकर जियो। अहंकार मरो, सत्य में जीयो।
हिंदी वीडियो:
The Real Meaning Of Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi - YouTube.
Transliteration
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam
Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat
This is the standard 24-syllable Vedic mantra from the Rigveda, chanted for protection and healing. en.wikipedia