ताओ ते चिंग

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छंद 1

ताओ जिसकी व्याख्या की जा सकती है, वह सनातन ताओ नहीं है।
नाम जिसकी व्याख्या की जा सकती है, वह सनातन नाम नहीं है।

वह जिसका कोई नाम नहीं है, वह ही अंतिम सत्य है।
नाम ही सभी सांसारिक वस्तुओं का स्रोत है।

कामना से रहित होकर ही इस रहस्य को समझा जा सकता है।
कामना के बंधन में सत्य नहीं दिखता, केवल अभिव्यक्ति दिखती है।

अभिव्यक्ति में ही रहस्य है।
जहां रहस्य जितना गहरा होता है, वहीं अभिव्यक्ति उतनी सूक्ष्म और अद्भुत होती है।

छंद 2

संसार में जो विपरीत है, वही एक-दूसरे से जुड़ा है।
उच्च और नीच, कठिन और आसान, लंबा और छोटा,
सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

यदि आप केवल एक को देखेंगे, तो दूसरा दिखेगा ही नहीं।
इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति सभी विपरीत को समझता है,
लेकिन उनमें फँसता नहीं।

वे केवल वस्तुओं को देखते हैं, स्वयं को नहीं।
इस समझ में ही संतुलन है, और इसी संतुलन में जीवन की सरलता छिपी है।

छंद 3

जब लोग प्रशंसा और लालसा के पीछे भागते हैं,
संसार में अशांति फैलती है।

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति कहता है:
“संतोष से रहो, लालसा को कम करो।
अच्छाई दिखाओ, विवाद पैदा मत करो।

लोगों को सिखाओ, लेकिन उनका बंधन मत बढ़ाओ।
उनको सरल जीवन में खुश रहने दो।

इस प्रकार सामंजस्य बना रहता है,
और जीवन में शांति बनी रहती है।”

छंद 4

ताओ खाली और सीमाहीन है,
जैसे खाली भट्टी या गहरा समुद्र।

वह सब कुछ समेट लेता है,
लेकिन स्वयं किसी चीज़ में बँधा नहीं है।

वह अनंत, स्थिर और निर्विकार है।
जो इसे समझता है, वह स्थिरता और शांति पाता है।

छंद 5

प्रकृति में कोई पसंद-नापसंद नहीं करता।
सूरज, चाँद और सितारे सभी अपनी भूमिका निभाते हैं।

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति भी किसी चीज़ में पक्षपात नहीं करता।
वे केवल काम करते हैं, परिणाम की इच्छा से मुक्त।

छंद 6

सभी जीवित चीज़ों में जीवन की ऊर्जा है।
इस ऊर्जा को ताओ कहते हैं।

जो इसे समझता है, वह शांति और संतोष में रहता है।
शक्ति को खींचने की जरूरत नहीं,
बल्कि सहज प्रवाह में बहता है।

छंद 7

सभी लोग मृत्यु की ओर बढ़ते हैं।
जीवन अस्थायी है, और सब बदलता है।

बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि
संग्रह और लालसा केवल दुख देते हैं।

इसलिए वह बिना बंधन के,
शांति और संतोष में रहता है।

छंद 8

सदाचार और करुणा सर्वोत्तम हैं।
बुद्धिमान व्यक्ति जीवन को सरल और नम्र बनाता है।

पानी की तरह रहो:
नम्र, हर जगह बहता है,
कमज़ोर दिखता है लेकिन सब कुछ जीत लेता है।

इस तरह जीवन में शक्ति और शांति बनी रहती है।

छंद 9

जब आप बहुत कुछ हासिल करने की कोशिश करते हैं,
तो असफलता मिलती है।

जितना अधिक आप पकड़ने की कोशिश करते हैं,
उतना ही खो देते हैं।

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति संतोष से काम लेता है,
और अत्यधिक लालसा से बचता है।

छंद 10

अपने शरीर, मन और आत्मा को एक साथ रखें।
सभी इच्छाओं को संतुलित करें।

यदि आप इसे समझते हैं,
तो आप डर, चिंता और अज्ञान से मुक्त रहते हैं।

जो अपने अंदर शांति पाता है,
वह बाहर की हलचल से प्रभावित नहीं होता।

छंद 11

गहरे कटोरे, खाली कमर,
और खुला द्वार—
उनकी उपयुक्तता इसलिए है क्योंकि उनमें अंतर है।

कुछ भी न होने से ही उपयोगिता है।
जो भरा हुआ है, वह कभी पूरी तरह उपयोगी नहीं हो सकता।

छंद 12

इन्द्रधनुष, आंखों की चमक,
सुगंध और स्वाद—
यदि इनसे अत्यधिक लिप्त हो, तो दुख बढ़ता है।

बुद्धिमान व्यक्ति लालसा और संवेदनाओं में नहीं फँसता।
वे केवल उनका आनंद लेते हैं, बिना आसक्ति।

छंद 13

सिद्धि और विफलता, लोकप्रियता और अपमान—
यह सब केवल दिखावा है।

जो स्थिर रहता है, वह इन चीजों से प्रभावित नहीं होता।
इस स्थिरता में ही वास्तविक शांति है।

छंद 14

चीजें जिन्हें आप देख या सुन सकते हैं,
वह केवल उनके रूप हैं।

वास्तविकता छिपी हुई है,
जो आँखों और कानों से बाहर है।

जो इसे समझता है, वह सतत शांति में रहता है।

छंद 15

अतीत और भविष्य, लंबा और छोटा,
सभी विपरीत केवल दृष्टि में हैं।

बुद्धिमान व्यक्ति उन्हें छूने या पकड़ने की कोशिश नहीं करता।
वे केवल उन्हें महसूस करते हैं और छोड़ देते हैं।

छंद 16

सही मार्ग अपनाने के लिए
कर्म और नियम की ज़रूरत नहीं।

वह जो सहज है, वही स्थिर है।
कदम बढ़ाते समय भी वह हल्का और मुक्त है।

छंद 17

सच्चा नेता लोगों को महसूस कराता है
कि वे स्वतंत्र हैं।
उन्हें आदेश नहीं देता,
बल्कि सहज मार्ग दिखाता है।

जब लोग महसूस करते हैं कि उन्हें कोई बाधा नहीं,
तो उनका जीवन संतुलित और सरल होता है।

छंद 18

अत्यधिक शब्द और दिखावा
सत्य की शक्ति को कम कर देते हैं।

जो शांति में रहता है,
वह कम बोलता है और अधिक करता है।

सत्य की गहराई मौन में है,
बोलने में नहीं।

छंद 19

लोग लालसा और अहंकार से मुक्त हों,
तो नैतिकता और झूठ की चिंता समाप्त हो जाती है।

जो सरल है, वही स्थिर है।
जहाँ सरलता है, वहाँ संतोष और शांति है।

छंद 20

संसार में लोग भागते हैं, थकते हैं,
लेकिन सुख नहीं पाते।

बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि
कम चाहना, कम करना,
और अंदर शांति रखना ही वास्तविक सुख है।

छंद 21

सर्वोच्च ताओ स्थिर और शांति में है।
वह न दिखाई देता है, न पकड़ में आता है।

जो इसे समझता है, वह अतीत और भविष्य से मुक्त रहता है।
वह सभी चीज़ों के साथ रहता है,
लेकिन किसी चीज़ में बंधा नहीं होता।

छंद 22

तुम नम्र बनो,
तो लोगों का सम्मान पाओगे।
कठोर बनो,
तो लोग डरेंगे, लेकिन प्यार नहीं देंगे।

वह जो नम्र और सरल है,
वह सभी चीज़ों के बीच स्थिर और सुरक्षित रहता है।

छंद 23

बहुत बोलने से बात खत्म नहीं होती,
बल्कि भ्रम बढ़ता है।

कम बोलो, और सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
ध्यान रखो कि शब्द केवल संकेत हैं,
सत्य उनका पालन नहीं करता।

छंद 24

जो व्यक्ति अपनी लालसा कम करता है,
वह स्थिर और स्वतंत्र रहता है।

जो अपनी शक्ति दिखाने में लगा रहता है,
वह हमेशा डर और चिंता में फँसा रहता है।

साधारण और शांत रहना ही सर्वोत्तम है।

छंद 25

ताओ अनंत और अप्रत्यक्ष है।
उसकी शक्ति सभी जगह व्याप्त है,
लेकिन उसे पकड़ना असंभव है।

सभी चीज़ें उससे जन्म लेती हैं,
लेकिन उसे सीमित नहीं किया जा सकता।

छंद 26

गहरी स्थिरता से कोई भी आसानी से हिल नहीं सकता।
इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति
स्वयं को स्थिर रखता है,
भले ही परिस्थितियाँ बदलती रहें।

छंद 27

जो कार्य बिना प्रयास करता है,
वह सबसे प्रभावी होता है।

जो बोलकर दूसरों को प्रभावित करता है,
वह जल्दी थक जाता है।

ताओ के मार्ग में,
काम सरल और सहज होता है।

छंद 28

柔 (नम्र) और स्थिर बने रहो।
जैसे पानी सबसे कोमल है,
लेकिन सभी चीज़ों को जीत लेता है।

नम्रता और सरलता में ही शक्ति है।
अत्यधिक कठोरता या अहंकार बर्बादी लाता है।

छंद 29

यदि तुम दुनिया को बदलने की कोशिश करोगे,
तुम उसे खो दोगे।

जैसे नदी को बांधने से उसका प्रवाह रुकता है,
वैसे ही शक्ति जब जबर्दस्ती लगाई जाती है,
तो परिणाम विपरीत होता है।

छंद 30

बुद्धिमान व्यक्ति लड़ाई और हिंसा से बचता है।
वे केवल स्वयं को मजबूत बनाते हैं,
और दूसरों को हानि नहीं पहुँचाते।

वह जो ताओ के मार्ग पर है,
वह शांत, सरल और सशक्त रहता है।

छंद 31

हथियार से शक्ति दिखाना
सच्ची शक्ति नहीं है।

बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि
सच्ची शक्ति नम्रता और संयम में है।

जो अधिक दिखावा करता है,
वह जल्दी थक जाता है।

छंद 32

सही मार्ग स्थिर और सरल है।
लोग इसे कठिन और जटिल बनाना चाहते हैं,
लेकिन जितना सरल होगा, उतना ही स्थिर रहेगा।

छंद 33

जो स्वयं को जानता है,
वह दूसरों को भी समझता है।

जो संतोषी है,
वह स्थिर और स्वतंत्र रहता है।

सत्ता और प्रसिद्धि केवल भ्रम हैं,
जो शांत और सरल है, वही स्थायी है।

छंद 34

सभी चीज़ें ताओ से जन्म लेती हैं,
लेकिन वह स्वयं किसी चीज़ में बंधा नहीं है।

वह स्थिर, शांति और संतुलन में है।
जो इसे समझता है, वही शांति और संतोष पाता है।

छंद 35

सबसे सुंदर और श्रेष्ठ मार्ग
अस्पष्ट और अदृश्य है।

जो इसे समझता है,
वह अपने हृदय में स्थिर और स्वतंत्र रहता है।

जहाँ शब्द समाप्त होते हैं,
वहीं ताओ शुरू होता है।

छंद 36

अत्यधिक लालसा और भक्ति
मनुष्य को असंतुलित बनाती है।

जो संतुलित और सरल है,
वह स्थिर और खुश रहता है।

कमी में ही संतोष है,
और संतोष में शांति।

छंद 37

ताओ सदा है,
लेकिन उसे पकड़ना असंभव है।

जो इसे अपनाता है,
वह सब कुछ पा लेता है।

वह जो इसे समझता है,
वह स्थिर और शांत रहता है।

छंद 38

सच्चा सम्मान दूसरों पर आधारित नहीं है।
सच्चा पुरस्कार लालसा से मुक्त है।

जो शांत और सरल है,
वह सबसे सम्मानित है।

छंद 39

एकता और विविधता
सभी चीज़ों में व्याप्त हैं।

जो इसे समझता है,
वह दूसरों में भेदभाव नहीं करता।

वह सबके साथ रहता है,
लेकिन किसी चीज़ में बंधा नहीं।

छंद 40

ताओ से सब कुछ आता है।
जो इसे जानता है, वह शांति में रहता है।

कदम बढ़ाओ, लेकिन हल्के और मुक्त रहो।
जितना अधिक प्रयास, उतना ही कम सफलता।

छंद 41

सच्चा ज्ञानवान व्यक्ति
बहुत कुछ नहीं कहता।

जो अधिक बोलता है,
वह भ्रम में फँस जाता है।

वास्तविक बुद्धि मौन में है,
बोलने में नहीं।

छंद 42

ताओ से सभी चीज़ें जन्म लेती हैं।
वे जीवन पाती हैं, रूप लेती हैं।

ताओ उनके पीछे है,
लेकिन स्वयं किसी चीज़ में नहीं बंधा।

जो इसे समझता है,
वह स्थिर और संतुलित रहता है।

छंद 43

सच्चा बल नम्रता में है।
जो कोमल है, वह सब कुछ जीत लेता है।

कठोर और अहंकारी जल्दी हारते हैं।
जो शांत और सरल है, वही स्थायी और सशक्त रहता है।

छंद 44

जितना अधिक तुम दूसरों को पाने की लालसा रखते हो,
उतना ही तुम्हें खोने का डर रहता है।

जो संतोषी है, वह स्थिर और स्वतंत्र है।
कम चाहो, और तुम सब कुछ पा लोगे।

छंद 45

सत्य सुंदर है,
लेकिन दिखाई नहीं देता।

शांति स्थिर है,
लेकिन महसूस की जाती है।

जो इसे समझता है,
वह बिना शब्दों के जानता है।

छंद 46

लोग सोचते हैं कि युद्ध और ताकत से शांति आएगी।
सच्चाई में,
शांति केवल सरलता और नम्रता से आती है।

जो अधिक दिखावा करता है,
वह अस्थिर और भयभीत रहता है।

छंद 47

जो बाहर की चीज़ों में आनंद ढूँढता है,
वह कभी पूर्ण सुख नहीं पाता।

जो भीतर शांति खोजता है,
वह सदा संतुष्ट रहता है।

सच्चा ज्ञान बाहर नहीं,
भीतर है।

छंद 48

जितना अधिक तुम सीखने की कोशिश करते हो,
उतना ही भ्रम बढ़ता है।

जो जानता है कि कम जानना ही पर्याप्त है,
वह स्थिर और स्वतंत्र है।

सच्चा शिक्षक वही है,
जो सरलता दिखाता है।

छंद 49

सभी लोग सत्य की खोज करते हैं,
लेकिन दृष्टि भ्रमित रहती है।

बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि
सत्य केवल अनुभव और सरलता में है।

जितना कम वह देखता है,
उतना अधिक समझता है।

छंद 50

जीवन और मृत्यु केवल परिवर्तन हैं।
जो इसे समझता है, वह डरता नहीं।

जन्म और मृत्यु के बीच संतुलन बनाए रखना ही
सच्चा मार्ग है।

छंद 51

सभी चीज़ें ताओ से जन्म लेती हैं,
लेकिन ताओ उनसे बंधा नहीं है।

जो इसे अपनाता है, वह शांति में रहता है।
जो इसे नहीं समझता, वह भय और लालसा में फँसता है।

छंद 52

ताओ स्थिर और शांत है।
जो इसे समझता है, वह स्थिर और संतुलित रहता है।

सभी प्राणी उससे जन्म लेते हैं,
और फिर उसी में लौट जाते हैं।

छंद 53

जो अपनी इच्छाओं को कम करता है,
वह सरल जीवन में संतोष पाता है।

जो अधिक चाहता है,
वह अशांति और दुख में फँसता है।

संतोष ही स्थिरता और स्वतंत्रता है।

छंद 54

सर्वोच्च नेता
लोगों को केवल मार्ग दिखाता है,
लेकिन उन्हें बाध्य नहीं करता।

जो स्वयं शांत और सरल है,
वह दूसरों को भी संतुलन सिखाता है।

छंद 55

सच्ची शक्ति बिना संघर्ष के है।
जो शांत और कोमल है,
वह सब कुछ जीत लेता है।

अहंकार और कठोरता केवल बर्बादी लाती हैं।

छंद 56

बुद्धिमान व्यक्ति विवाद में नहीं पड़ता।
वह केवल वस्तुओं और घटनाओं को समझता है,
लेकिन किसी में फँसता नहीं।

सच्ची स्थिरता और स्वतंत्रता यही है।

छंद 57

सच्चा शासन
कम आदेश और अधिक स्वतंत्रता देता है।
लोग स्वयं जिम्मेदार और संतुलित बनते हैं।

जो अत्यधिक नियंत्रण करता है,
वह अशांति और डर फैलाता है।

छंद 58

सफलता और विफलता केवल दिखावा हैं।
जो अधिक महत्व देता है, वह अस्थिर होता है।

बुद्धिमान व्यक्ति संतोषी है,
और परिणाम की चिंता नहीं करता।

छंद 59

सुरक्षा और शक्ति
केवल सरलता और संयम से मिलती है।

जो अधिक दिखावा करता है,
वह जल्दी हिल जाता है।

सच्चा नेता शांत और नम्र होता है।

छंद 60

ताओ मार्ग सरल है।
जो इसे अपनाता है,
वह भय और लालसा से मुक्त रहता है।

कदम बढ़ाते समय हल्का रहो,
काम सहज और स्वाभाविक होगा।

छंद 61

सच्चा नेता
लोगों को भार नहीं देता।
जो लोग स्वतंत्र रहते हैं,
वह उन्हें मार्ग दिखाता है।

जो कठोर और दबाव डालता है,
वह डर और अशांति फैलाता है।

छंद 62

ताओ सबसे प्रिय है,
लेकिन दिखाई नहीं देता।
सबसे मजबूत है,
लेकिन कोमल और नम्र है।

जो इसे अपनाता है, वह स्थिर और मुक्त रहता है।

छंद 63

काम को बिना लालसा किए पूरा करो।
जो अधिक चाहता है,
वह असफल होता है।

जो शांत और सरल है,
वह सफलता और संतोष पाता है।

छंद 64

बड़ी यात्राएं छोटी शुरुआत से होती हैं।
जो जल्दबाजी करता है,
वह पीछे पड़ जाता है।

धैर्य और निरंतरता ही
सच्चा मार्ग है।

छंद 65

सच्चा नेता
अपने आप को दिखाता नहीं।
वह केवल मार्ग दिखाता है।

लोग उसे सम्मान देते हैं,
लेकिन भय नहीं रखते।

छंद 66

जो नम्र और सरल है,
वह सबको आकर्षित करता है।
जो कठोर और अहंकारी है,
वह केवल विरोध पाता है।

नम्रता में शक्ति है।

छंद 67

सबसे अच्छा मार्ग
शांत और सरल है।
जो अधिक बोलता है,
वह भ्रम में पड़ता है।

मौन और सरलता में ही
सच्ची बुद्धि है।

छंद 68

जो लड़ाई से बचता है,
वह वास्तव में विजयी होता है।
जो अहंकार और शक्ति दिखाता है,
वह अस्थिर और भयभीत रहता है।

सच्चा बल नम्रता में है।

छंद 69

बुद्धिमान व्यक्ति
सदैव दूसरों से मेल करता है,
लेकिन स्वयं को नहीं खोता।

वह दूसरों को नियंत्रित नहीं करता,
बल्कि उन्हें सहजता से मार्ग दिखाता है।

छंद 70

सत्य को समझने वाला
कम बोलता है।
जो अधिक बोलता है,
वह भ्रमित होता है।

सभी चीज़ें ताओ से जन्म लेती हैं,
और उसी में लौटती हैं।

छंद 71

सच्चा ज्ञानवान व्यक्ति
अपने दोषों को स्वीकार करता है।
जो दूसरों को दोष दिखाता है,
वह स्वयं भ्रमित रहता है।

स्वीकार्यता और नम्रता में ही बुद्धि है।

छंद 72

सच्चा नेता
लोगों को डराता नहीं।
जो भय फैलाता है,
वह विश्वास खो देता है।

मौन और सरल मार्ग
असली स्थिरता देता है।

छंद 73

लक्ष्य को बिना लालसा के प्राप्त करो।
यदि तुम अधिक चाहोगे,
तो भय और चिंता बढ़ जाएगी।

जो संतोषी है, वह मुक्त है।

छंद 74

सच्चा नेता
अपने शक्ति का प्रदर्शन नहीं करता।
जो शक्ति दिखाता है,
वह अस्थिर और भयभीत रहता है।

नम्रता में ही स्थायित्व है।

छंद 75

संसार में लोग अशांति फैलाते हैं,
क्योंकि वे लालसा और अहंकार में रहते हैं।

जो संतोष और शांति अपनाता है,
वह स्थिर और मुक्त रहता है।

छंद 76

जीवन में सख्ती और कठोरता
दुर्भावना और कठिनाई लाती है।

जो नम्र और लचीला है,
वह सभी बाधाओं को पार करता है।

छंद 77

ताओ मार्ग स्थिर और सरल है।
जो इसे अपनाता है, वह संतुलन और शांति पाता है।

जो अधिक प्रयास और अहंकार दिखाता है,
वह अस्थिर और भ्रमित रहता है।

छंद 78

सच्चा बल नम्रता में है।
जो कठोर है, वह जल्दी टूटता है।
जो कोमल और लचीला है,
वह सभी कठिनाईयों में स्थिर रहता है।

छंद 79

संसार में लोग विवाद और युद्ध करते हैं।
बुद्धिमान व्यक्ति इसे रोकने के लिए प्रयास करता है।
लेकिन वह बिना लालसा और अहंकार के करता है।

सत्य और शांतिपूर्ण मार्ग ही स्थायी है।

छंद 80

सादा और सरल जीवन सबसे उत्तम है।
कम वस्तुएँ, कम लालसा,
और अधिक संतोष।

जो संतोषी है, वह स्थिर और स्वतंत्र है।

छंद 81

सच्चा ताओ मार्ग
कम बोलता है, अधिक करता है।
जो इसे समझता है, वह स्थिर, शांत और संतुलित रहता है।

सभी चीज़ें ताओ से जन्म लेती हैं,
और उसी में लौटती हैं।