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मन से 4 तल होते है —
आत्मा
│
व्रतति
│
विचार
│
कर्म (स्थूल)
सूत्र -> किसी भी तल को उसके नीचे के तल से नहीं जीता जा सकता ।
कर्म और विचार कभी व्रत्ती पर नहीं जीत सकती । सिर्फ आत्मा जीत सकती है । इसीलिए चाहिए [[आत्मज्ञान]]।
कर्म पर विचार भरी पड़ेगा । अगर आपके विचार उल्टे पुलटे है तो आप कुछ भी कर लीजिये विचार नहीं सुधारने वाले । लेकिन विचार सही होंगे तो कर्म भी सही हो जाएंगे । विचार पर व्रतति भरी पड़ेगी । मोह व्रतति है । व्रतति को मात्र आत्मा के द्वारा ही जीता जा सकता है ।
[[श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 सार — गीता दुनिया की सारी समस्या का समाधान है#श्लोक २१-३९ —> व्रत्ति बनाम विचार|व्रत्ति बनाम विचार]]