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धर्म ओर कर्तव्य क्यो कहे, जीवन तो प्रेम
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शून्यता में ही सतानंदप्रेम है, छोड़ो सारे भेद
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जन्म मरण के बारे में सोचे बोरे
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पूछे लोग क्या बनना तुझे, क्या बनु इस जलती हुई दुनिया में
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फिरत फिरत माया के पीछे, चाहे बोरे राम
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बोरे बनना चाहे कलाकार, मांगे जग का आदर
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दिनचर्या को माने दुख, जीवन को माने श्राप
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कल मनुष्य आज ai, माया का ये खेला
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चाहे ढूँढना जीवन का मतलब, न देखे है ब्रह्म सागर में
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संघर्ष कैसे करूँ
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अब नींद क्या है जब बन गया राम का मजदूर
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बकरियाँ कटवाती है अपना गला, चाहे कटवाना मेरा भी गला
2026
बकरियाँ कटवाती है अपना गला, चाहे कटवाना मेरा भी गला
अब नींद क्या है जब बन गया राम का मजदूर
संघर्ष कैसे करूँ
चाहे ढूँढना जीवन का मतलब, न देखे है ब्रह्म सागर में
2025
कल मनुष्य आज ai, माया का ये खेला
दिनचर्या को माने दुख, जीवन को माने श्राप
बोरे बनना चाहे कलाकार, मांगे जग का आदर
फिरत फिरत माया के पीछे, चाहे बोरे राम
पूछे लोग क्या बनना तुझे, क्या बनु इस जलती हुई दुनिया में
जन्म मरण के बारे में सोचे बोरे
शून्यता में ही सतानंदप्रेम है, छोड़ो सारे भेद
धर्म ओर कर्तव्य क्यो कहे, जीवन तो प्रेम