तोहि मोहि लगन लगाय रे फकीरवा
तोहि मोहि लगन लगाय रे फकीरवा ।
सोबत ही मैं अपने मंदिर में,
सबद बान मारि जगाये रे फकीरवा ।
डूबत ही भव के सागर में,
बहियां पकरि समुझाये रे फकीरवा ।
एकै बचन बचन नहिं दूजा,
तुम मोसे बंद छुड़ाये रे फकीरवा ।
कहैं कबीर सुनो भाई साधो,
प्राणन प्राण लगाये रे फकीरवा ।
~ कबीर साहब
तोहि मोहि लगन लगाय रे फकीरवा ।
ओ फकीर! तूने मुझमें प्रेम जगा दिया है।
सोबत ही मैं अपने मंदिर में,
सबद बान मारि जगाये रे फकीरवा ।
मैं तो अपनी शांत जगह पर सोई पड़ी थी
तूने सच्चे शब्दों के बाण मारकर मुझे जगा दिया
डूबत ही भव के सागर में,
बहियां पकरि समुझाये रे फकीरवा ।
मैं तो संसार सागर में डूब ही गई थी
पर तूने मुझे बाँह पकड़कर समझाया
एकै बचन बचन नहिं दूजा,
तुम मोसे बंद छुड़ाये रे फकीरवा ।
तुमने मुझे वो एक बात बताई जो बाकी सब बातों से मुक्त कर देती है
तुमने मुझे बंधनों से छुटा दिया, रे फकीर!
कहैं कबीर सुनो भाई साधो,
प्राणन प्राण लगाये रे फकीरवा ।
कबीर साहब कहिे हैं, सुनो साधुजन,
फकीर ने मेरे प्राणो में प्राण डाल तदए।
मैं तो सो रही थी, बाँह पकड़ मुझे जगाया क्यों? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर साहब पर (2023) - YouTube।