उड़ जायेगा हंस अकेला
उड़ जायेगा हंस अकेला, जग दर्शन का मेला।
जैसे पात गिरे तरुवर से, मिलना बहुत दुहेला,
ना जाने किधर गिरेगा, लग्या पवन का रेला।
जब होवे उमर पूरी, जब छूटेगा हुकुम हुजूरी
यम के दूत बड़े मज़बूत, यम से पड़ा झमेला।
दास कबीर हर के गुण गावे, वा हर को पारण पावे।
गुरु की करनी गुरु जायेगा, चेले की करनी चेला।
~ कबीर साहब
“उड़ जायेगा हंस अकेला, जग दर्शन का मेला।
हंस (आत्मा) अकेला उड़ जाएगा, जब संसार का मेला समाप्त हो जाएगा।
“जैसे पात गिरे तरुवर से, मिलना बहुत दुहेला,
जैसे पेड़ से पत्तियाँ गिरती हैं, वैसे ही मिलना बहुत कठिन होता है।
“ना जाने किधर गिरेगा, लग्या पवन का रेला।
किस दिशा में गिरेगा, यह नहीं पता, जैसे हवा का तूफान कभी भी दिशा बदल सकता है।
“जब होवे उमर पूरी, जब छूटेगा हुकुम हुजूरी।
जब जीवन की उम्र पूरी होगी, और जीवन का आदेश समाप्त होगा।
“यम के दूत बड़े मज़बूत, यम से पड़ा झमेला।
यमराज के दूत बहुत शक्तिशाली होते हैं, उनके कारण मृत्यु का भय उत्पन्न होता है।
“दास कबीर हर के गुण गावे, वा हर को पारण पावे।
कबीर कहते हैं, जो ईश्वर के गुण गाता है, वही ईश्वर को प्राप्त करता है।
“गुरु की करनी गुरु जायेगा, चेले की करनी चेला।
गुरु की क्रिया गुरु के पास जाएगी, और शिष्य की क्रिया शिष्य के पास जाएगी।
इस भजन में कबीर साहब जीवन और मृत्यु के रहस्यों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। वे कहते हैं कि जीवन एक मेला है, जिसमें हम सभी को अपनी यात्रा अकेले ही करनी होती है। वे यह भी सिखाते हैं कि गुरु और शिष्य के कर्मों का फल दोनों को अलग-अलग मिलता है, और अंत में जो ईश्वर का भजन करता है, वही सच्चे आनंद और मुक्ति को प्राप्त करता है।