व्रत्ति

व्रत्ति = जन्मजात झुकाव।
जो शिशु में है। जो पशु में है।

व्रत्ति = मोह, भय, लोभ, अपने अस्तित्व को बचाने की प्रवृत्ति, “मैं रहूँ”

शिशु के पास विचार नहीं होते।
पशु के पास तर्क नहीं होते।

फिर भी व्रत्ति होती है।

इसलिए व्रत्ति विचार से गहरी है।