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BHAJAN
भजन सुनो और मुक्त हो जाओ
Listen Bhajan and Be Free
चलना है दूर मुसाफ़िर
माया तजूं तजि नहिं जाइ
जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल
इश्क़ है आसमां में उड़ के जाना
जो मैं बोरा तो राम तोरा
मन मस्त हुआ तब क्यों बोले
राम भजा सो जीता जग में
तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे
राम बिन तन की ताप न जाई
अब हम गुम हुए, गुम हुए, गुम हुए प्रेम नगर की सैर
अमरपुर ले चलो सजना
निर्वाण षट्कम
मोको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में
पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवत हाँसी
पीले प्याला हो मतवाला
ना मैं धर्मी नाहिं अधर्मी
साधो ये मुर्दों का गाँव
नैहरवा हमका न भावे
क्या तन मांजतारे एक दिन माटी में मिल जाना
जग बौराना
जगत में कैसा नाता रे
उड़ जायेगा हंस अकेला
नहिं मानै मूढ़ गँवार, मैं कैसे कहूँ समझाय
मेरी नैया पड़ी है मजधार
घूँघट के पट खोल रे
तोहि मोहि लगन लगाय रे फकीरवा
घड़ियाली दियो निकाल नी
माटी कुदम करेंदी यार वाह वाह माटी दी गुलज़ार
श्री हरि स्तोत्रम्
वारि जाऊँ मैं सतगुरु के
हमन है इश्क मस्ताना
पिया मोर जागे मैं कैसे सोई री
रहना नहीं देस बिराना है
खलक सब रैन का सपना
जागु पियारी अब का सोवे
मैनूं कौन पछाणे
रैन दिवस पिय संग रहत हैं
THE WAY OF INFINITY
हम अनंत है
We are Infinite
I Am Not in Time; Time Is Within Me
मैं समय में नहीं हूँ, समय मुझमे हैं
List of my favorite gita lines
Shakya Framework: The Real Problem Isn’t the World — It’s the Ego That Sees It
शाक्य फ्रेमवर्क: असली समस्या दुनिया नहीं है — बल्कि वह अहंकार है जो इसे देखता है
MY POETRY
धर्म ओर कर्तव्य क्यो कहे, जीवन तो प्रेम
शून्यता में ही सतानंदप्रेम है, छोड़ो सारे भेद
जन्म मरण के बारे में सोचे बोरे
पूछे लोग क्या बनना तुझे, क्या बनु इस जलती हुई दुनिया में
फिरत फिरत माया के पीछे, चाहे बोरे राम
बोरे बनना चाहे कलाकार, मांगे जग का आदर
दिनचर्या को माने दुख, जीवन को माने श्राप
कल मनुष्य आज ai, माया का ये खेला
चाहे ढूँढना जीवन का मतलब, न देखे है ब्रह्म सागर में
संघर्ष कैसे करूँ
अब नींद क्या है जब बन गया राम का मजदूर
बकरियाँ कटवाती है अपना गला, चाहे कटवाना मेरा भी गला
MOMENTS OF CLARITY
See everything in its entirety effortlessly
Illusions of a Leaf
You are Infinite
Bread and Circuses
Happiness
Enjoy the side trips
Hinduism
Illusion of Peace
Purpose of Life
Be Bored
Less is better
You're born as a tree
All Paths of Yoga are same
Life is not suffering
Be Kojiro
All strong people are kind.
Life is like fighting a dragon
We are nothing and everything
It's natural order for human to achieve their potential
Being alone makes you strong
If you can’t appreciate the useless, you’ll never understand what’s truly useful
माया नहिं तंह ब्रह्म ज्ञान
प्रेम क्या है
The more you see that there no free will - more free you become
Be an idiot
Useless things makes useful things possible
Always have Chidananda Rupah Infinite Mind
Understand duality of things
Beauty in meaninglessness
Spirituality starts from very source of yours
अहम का अस्तित्व और उसकी निरर्थकता
कोई कर्ता नहीं है
Don't let words become the cage
Birds don't think about flying
The empty boat
There is nothing to awaken just let go of the ego
Ego is finite number and atma is infinite number
जो कुछ किसी और पर आश्रित हो, वह सत्य नहीं है
I have achieved enlightenment
WISDOM LITERATURE
The Door in the Wall — By H.G. Wells
The Country of the Blind — By H.G. Wells
We Live as One Lives — By Martin Heidegger
Waiting for Godot — By Samuel Beckett
Shunyata Saptati
शून्यता सप्तति
Tao Te Ching
ताओ ते चिंग
Chuang Tzu's Poems
Graeco-Roman Parables
Hindu Parables
Sufi Parables
Zen Parables
कबीर के दोहे
मधुशाला
आचार्य प्रशांत कविता
नारद भक्ति सूत्र
AVALOKAN
अष्टावक्र गीता 13.4, 13.5 — मैं सारे बंधन परे आनंद में स्थित हूँ
ताओ ते चिंग अध्याय 14 — देखो-उसे देखा नहीं जा सकता
कठोपनिषद 1.2.15 — ॐ क्या है?
शून्यता सप्तति छंद 1 — सब शून्य है, सब झूठ है
The Country of the Blind — In the Land of the Blind, Who Needs Eyes?
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 43 — पुनः जन्म प्रतिपल है
ना मैं धर्मी नाहिं अधर्मी सत्र 7 — सत्य को तो सिर्फ एक बिरला बुझता है
ना मैं धर्मी नाहिं अधर्मी — कबीर न कुछ बनाते हैं, न कुछ मिटाते हैं
वारि जाऊँ मैं सतगुरु के सत्र 1 — सच्चा गुरु कोन?
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 44 — जिज्ञासा से शब्द-ब्रह्म के पार तक
शून्यता सप्तति छंद 30 — न सशर्त, न निःशर्त, कुछ भी नहीं
We Live as One Lives — On Imitation, Ego, and Borrowed Life
Shrimad Bhagavad Gita 3.16 — A life spent consuming is a life wasted
कठोपनिषद 1.2.16 — अक्षर को जानना ही इच्छा-समाप्ति है
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 46 — सबसे श्रेष्ठ योगी है
Shrimad Bhagavad Gita Chapter 3, Verse 17 — On Ego, Duty, and Freedom
Waiting for Godot — On Waiting as Self-Sabotage
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 47 — जो केवल कृष्ण को ही भजते हैं, वही सर्वश्रेष्ठ योगी हैं
खलक सब रैन का सपना सत्र 1 — न अहंकार सत्य है, न विषय से संबंध
अष्टावक्र गीता श्लोक 13.7 — आनंद सुख-दुःख के अभाव का नाम है
खलक सब रैन का सपना सत्र 2 — कठिन है मोह की धारा, बहा सब जात संसारा
The Door in the Wall — Don't be a chair, choose freedom
ऋभु गीता अध्याय 4, श्लोक 10-20 — अनात्मा जैसा कुछ भी नहीं है
I Am Not in Time; Time Is Within Me
मैं समय में नहीं हूँ, समय मुझमे हैं
The Glamour Trap — How Society Sells Success and Hides the Self
क से ख तक — व्यावहारिक वेदांत भाग 1
The Little Prince — What Adults Forget: Lessons on Love and Conditioning
अवधूत गीता — जहाँ मैं नहीं, वहीं शिव
ताओ ते चिंग अध्याय 15 — ज्ञानी का स्वरूप और ध्यान का अर्थ
Shrimad Bhagavad Gita 3.19 — Check, Correct, Continue: The Discipline of Non-Attached Action
आप सच में क्या चाहते हैं? एक ईमानदार जाँच — व्यवहारिक वेदांत भाग 2
सनातन धर्म क्या है? — मन को प्रकृति के पार ले जाना
Just Drop the Rock Mr. Sisyphus — You're Not a Hero of a Tragic Story
प्रेम ही पथ है: भक्ति और ज्ञान की आंतरिक एकता — भक्तिसूत्र भाग 1
प्रेम न्यौछावर होने की तैयारी है — भक्तिसूत्र भाग 2
श्रीमद्भगवद्गीता 7.1, 7.2 — अहं, विज्ञान और पूर्णज्ञान
Shrimad Bhagavad Gita 3.20 — Let Life Be: Intelligence Beyond the Ego
कठोपनिषद - 1.2.17 — क्यों ब्रह्म आश्रय ही श्रेष्ठ है?
When Meaning Is Seen, Words Are Forgotten — Chuang Tzu's Poems Part 1
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 3 — हजारों मनुष्यों में कोई एक सिद्धि के लिए यत्न करता है
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 सार — गीता दुनिया की सारी समस्या का समाधान है
The Death of a Government Clerk — From Sneeze to Death
शून्यता सप्तति छंद 31 — कोहम? अहं की जाँच में उत्पत्ति, स्थित और विनाश का लय
Bhagavad Gita 3.21 — Why Nobody Really Listens to the Gita And Why Krishna Still Spoke
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 श्लोक 4 — प्रकृति के आठ रूप और अहंकार का रहस्य
अष्टावक्र गीता 14.1 — शून्य चित्त और अहंकार का नशा: मनुष्य क्यों सोते हुए भी जागा हुआ लगता है
खलक सब रैन का सपना सत्र 3 — घड़ा जो नीर का फूटा, पत्र ज्यों डार से टूटा
What Is Philosophy, Really? — Not the Search for Truth, but the Removal of Falseness
ताओ ते चिंग अध्याय 1 — ताओ जिसकी व्याख्या की जा सकती है वह सनातन ताओ नहीं है
Bhagavad Gita 3.22 — Desireless, Yet Fully Engaged: The Paradox Ego Cannot Understand
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 5 — परा और अपरा प्रकृति: एक ही सत्य का विभाजन, अहं की समझ के लिए
माने क्या?
मैं समय में नहीं हूँ, समय मुझमे हैं
सनातन धर्म क्या है? — मन को प्रकृति के पार ले जाना
अहंकार माने क्या
आत्मा माने क्या
चेतना माने क्या
नोकरी माने क्या
प्रेम माने क्या
बोध माने क्या
ब्रह्म माने क्या
मन माने क्या
माया माने क्या
मुक्ति माने क्या
सत्य माने क्या
होश माने क्या
प्रेम प्रेम सब कोइ कहे, प्रेम न चीन्हे कोय
माया मरी न मन मरा, मर मर गए शरीर
आत्म-अवलोकन
अष्टावक्र गीता 14.1 — आत्म अवलोकन
EVERGREEN NOTES
Ego
Love
Maya
Attachment
Samsara
अहंकार
प्रेम
माया
मोह
संसार
Ignorance
Liberation
Rebirth
Time
Beauty
Word
Present
Thought and time
अज्ञान
पुनर्जन्म
मुक्ति
वर्तमान
विचार
शब्द
समय
सौंदर्य
द्वैत
ध्यान
नींद
बोध केंद्र
मृत्यु
राम
विषय और विषयी का एकत्व
संघर्ष
समता
समत्व ही शिवत्व है
सरलता और जटिलता
साक्षीत्व
अवलोकक प्रभाव
जीवत्व मिटना ही एकत्व है
माने क्या
अस्तित्वगत दुख
आत्मविसर्जन
कर्तव्य
कृष्ण
ज्ञान
दुःख
निष्काम कर्म
प्रकृति
ब्रह्म
भक्ति
मन
महत्वाकांक्षा
सत्य
समत्व
अद्वैत
अविद्या
आत्मज्ञान
भोलापन
विज्ञान
विद्या
सनातन
आत्मा
कामना
व्रत्ति
सनातन धर्म
आत्म अवलोकन
Nishkama karma
ज्ञानी
विवेक
Ascension
Attainment
Ego is a range
Psychological accounting
Desire as fuel
Illusion of ascent
जीव
MANTRA
Maha Mrityunjaya Mantra
महामृत्युंजय मंत्र
बोधकार्य
2026 02 15 🔱 बोधकार्य — जन्मदिवस पर, जन्मदाता को कविता पर सीख
MUSIC
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए
ओरे मनवा तू तो बावरा है (इकतारा)
रात और दिन दिया जले
MENTAL MODEL
Mm G01
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List of my favorite gita lines
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